नई दिल्ली: वैश्विक फुटबॉल जगत में उस समय नई स्थिति बन गई जब ईरान ने FIFA World Cup 2026 के बहिष्कार की अपनी धमकी वापस ले ली। हालांकि, ईरान अब भी इस बात पर कायम है कि उसकी टीम अमेरिका में अपने निर्धारित मैच नहीं खेलेगी। इस फैसले ने टूर्नामेंट के आयोजन और शेड्यूल को लेकर नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं।
अमेरिका को लेकर रुख सख्त
ईरान फुटबॉल फेडरेशन के प्रमुख मेहदी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय टीम विश्व कप की तैयारियां जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि टीम टूर्नामेंट का हिस्सा बनेगी, लेकिन अमेरिका में मैच खेलने से परहेज करेगी। ताज के अनुसार, “हम विश्व कप का बहिष्कार नहीं कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका में खेलने का सवाल अलग है।” इस बयान से साफ है कि ईरान ने पूरी तरह पीछे हटने के बजाय एक संतुलित रुख अपनाया है।
तीन देशों में होगा आयोजन
विश्व कप 2026 का आयोजन 11 जून से 19 जुलाई के बीच अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में होना है। यह पहली बार होगा जब टूर्नामेंट तीन देशों की मेजबानी में खेला जाएगा। ईरान के इस रुख के चलते आयोजन समितियों और FIFA के सामने लॉजिस्टिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, खासकर अगर मैचों के वेन्यू में बदलाव की मांग उठती है।
विवाद की पृष्ठभूमि
फरवरी के अंत में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद यह मुद्दा सामने आया। सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक हालात को देखते हुए ईरान ने अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। ईरान पहले ही विश्व कप 2026 के लिए क्वालीफाई करने वाली शुरुआती टीमों में शामिल है। इसके बावजूद मैच स्थल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
दोस्ताना मैचों की योजना
तैयारियों को प्रभावित न होने देने के लिए ईरान ने वैकल्पिक रणनीति तैयार की है। मेहदी ताज के मुताबिक, टीम तुर्की में ट्रेनिंग कैंप लगाएगी और वहां दो मैत्रीपूर्ण मैच खेलेगी। यह कदम दिखाता है कि टीम अपनी तैयारी को लेकर गंभीर है और किसी भी परिस्थिति में प्रदर्शन से समझौता नहीं करना चाहती।
सरकार और खेल प्रशासन के अलग रुख
ईरान के खेल मंत्री Ahmad Donyamali ने पहले संकेत दिया था कि देश विश्व कप में हिस्सा नहीं ले सकता। हालांकि, फुटबॉल फेडरेशन के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि टीम टूर्नामेंट में भाग लेगी। इससे यह भी संकेत मिलता है कि खेल और राजनीतिक स्तर पर अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं।
फीफा और मेक्सिको की प्रतिक्रिया
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने कहा कि अंतिम निर्णय फीफा के हाथ में है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी टीमें निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भाग लेंगी। वहीं, FIFA ने भी पुष्टि की है कि वह ईरान फुटबॉल फेडरेशन के संपर्क में है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि फीफा के सामने अब दो विकल्प हैं—या तो ईरान के मैचों का स्थान बदला जाए या टीम को मौजूदा शेड्यूल के अनुसार खेलने के लिए राजी किया जाए। यदि वेन्यू बदलता है, तो इससे पूरे टूर्नामेंट की योजना प्रभावित हो सकती है। वहीं, यदि कोई समाधान नहीं निकलता, तो विवाद और गहरा सकता है।
ईरान का यह रुख दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों पर राजनीतिक परिस्थितियों का असर पड़ सकता है। फिलहाल, टीम विश्व कप में भाग लेने के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका में खेलने से इनकार ने नई जटिलता पैदा कर दी है। अब सभी की नजर फीफा के फैसले पर टिकी है, जो इस विवाद का अंतिम समाधान तय करेगा।
