नई दिल्ली: यूएन की ताज़ा रिपोर्ट में भारत को बच्चों की मृत्यु दर कम करने के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाला देश बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में भारत ने नवजात और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी और इसे देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों की बड़ी सफलता बताया।
यूएन रिपोर्ट में भारत की अहम भूमिका
United Nations Inter-agency Group for Child Mortality Estimation (UNIGME) की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बाल मृत्यु दर में आई गिरावट में भारत का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम लागू कर बच्चों के जीवन बचाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। खासतौर पर नवजात शिशुओं और पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए किए गए प्रयासों को सराहा गया है।
आंकड़े बताते हैं बड़ी सफलता
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में नवजात शिशु मृत्यु दर में करीब 70% की गिरावट दर्ज की गई है। यह दर 1990 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 57 थी, जो 2024 में घटकर 17 रह गई है। इसी तरह, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79% की कमी आई है—जो 1990 में 127 से घटकर 2024 में 27 हो गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत ने लंबे समय में लगातार और प्रभावी कदम उठाए हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की भूमिका
रिपोर्ट में इस सफलता का श्रेय भारत की मजबूत और समन्वित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को दिया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों ने जमीनी स्तर पर असर दिखाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं को केवल नीति तक सीमित न रखकर उन्हें प्रभावी तरीके से लागू किया गया, जिससे मापने योग्य परिणाम सामने आए।
दक्षिण एशिया में भारत का प्रभाव
पिछले दो दशकों में भारत ने दक्षिण एशिया में बाल मृत्यु दर कम करने में प्रमुख भूमिका निभाई है। 1990 के बाद पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में 76% और 2000 के बाद 68% की कमी आई है। इस क्षेत्र में कुल गिरावट का बड़ा हिस्सा भारत जैसे देशों के प्रयासों का परिणाम माना गया है। दक्षिण एशिया में 2000 में प्रति 1,000 जन्मों पर 92 मौतें होती थीं, जो 2024 तक घटकर लगभग 32 रह गई हैं।
रोकथाम योग्य बीमारियों पर नियंत्रण
भारत में निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्म से जुड़ी जटिलताओं जैसी बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन बीमारियों से होने वाली अधिकांश मौतें रोकी जा सकती हैं, और भारत ने इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए हैं।
टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
बाल मृत्यु दर में कमी का एक बड़ा कारण सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम और संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी है। इसके अलावा, नवजात और बचपन की बीमारियों के एकीकृत प्रबंधन (IMNCI) और विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (NICU) के विस्तार ने भी अहम भूमिका निभाई है। दक्षिण एशिया में 2000 के बाद NICU से जुड़े बच्चों की मौतों में लगभग 60% की कमी आई है, जबकि 1 से 59 महीने के बच्चों की मृत्यु दर में 75% से अधिक गिरावट दर्ज की गई है।
चुनौतियां अब भी बरकरार
हालांकि उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण एशिया में अब भी दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 25% मौतें होती हैं। इसका मतलब है कि सुधार की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है और स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यूएन रिपोर्ट में भारत के प्रयासों की सराहना की गई है। उन्होंने इसे देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। भारत में बाल मृत्यु दर में आई गिरावट यह दर्शाती है कि सही नीतियों, मजबूत स्वास्थ्य ढांचे और सतत प्रयासों से बड़े बदलाव संभव हैं। हालांकि आगे की चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन अब तक की उपलब्धियां यह संकेत देती हैं कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
