सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा के लिए बढ़ी सख्ती

दुनिया भर में सरकारें अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा सख्त कदम उठा रही हैं। लंबे समय तक टेक कंपनियां यह कहती रहीं कि किशोरों की उम्र की सही पहचान करना तकनीकी रूप से मुश्किल है और इससे सुरक्षा तथा गोपनीयता के खतरे भी बढ़ सकते हैं। लेकिन अब कई देशों के नियामक मानते हैं कि तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उम्र की जांच (Age Verification) संभव है। यही वजह है कि सोशल नेटवर्क, एआई चैटबॉट और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के लिए सख्त उम्र जांच नियम लागू करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के फैसले के बाद बढ़ी वैश्विक बहस

इस दिशा में सबसे बड़ा कदम तब देखा गया जब Australia ने तीन महीने पहले किशोरों के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने वाला ऐतिहासिक कानून लागू किया। इस फैसले के बाद कई अन्य देश और क्षेत्र भी इसी तरह के नियमों पर विचार कर रहे हैं। यूरोप, ब्राज़ील और अमेरिका के कुछ राज्यों में भी ऐसे नियमों को लागू करने की तैयारी चल रही है। अमेरिका के Gavin Newsom ने भी हाल ही में सोशल मीडिया पर उम्र सीमा को लेकर सख्त कदम उठाने का समर्थन किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन दुर्व्यवहार, किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं और एआई से बने आपत्तिजनक कंटेंट के मामलों में बढ़ोतरी ने सरकारों को कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है।

‘एज एश्योरेंस’ तकनीक हुई ज्यादा मजबूत

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में एज एश्योरेंस (Age Assurance) तकनीक में तेजी से सुधार हुआ है। यह तकनीक किसी व्यक्ति की अनुमानित उम्र का पता लगाने के लिए कई डिजिटल संकेतों का इस्तेमाल करती है। इनमें चेहरे की पहचान, माता-पिता की मंजूरी, सरकारी पहचान पत्र की जांच और ऑनलाइन गतिविधियों का विश्लेषण शामिल हो सकता है। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था Common Sense Media की वरिष्ठ सलाहकार Ariel Fox Johnson के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इस तकनीक का बाजार तेजी से परिपक्व हुआ है। उन्होंने कहा कि बेहतर तकनीक के साथ-साथ अब ऐसे उपकरणों के मूल्यांकन के लिए मानक और प्रमाणन प्रणाली भी विकसित की जा रही है।

टेक कंपनियां भी अपना रही नई प्रणालियां

आज कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी यूजर की उम्र का अनुमान लगाने के लिए अकाउंट बनने का समय, देखे जाने वाले कंटेंट और अन्य डिजिटल संकेतों का उपयोग करते हैं। इसके अलावा Yoti, Persona और k-ID जैसी कंपनियां पहचान सत्यापन के लिए अलग-अलग टूल उपलब्ध करा रही हैं। ये टूल फेस स्कैन, सरकारी पहचान पत्र की मशीन आधारित जांच और अन्य डिजिटल तरीकों से उम्र का अनुमान लगाते हैं।

एआई से बढ़ी सटीकता और कम हुई लागत

शोध संस्थान Forrester के विशेषज्ञों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल से उम्र पहचानने वाली तकनीक की सटीकता पहले से काफी बेहतर हुई है। साथ ही इन प्रणालियों की लागत भी काफी कम हो गई है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आज कई कंपनियां प्रति जांच एक डॉलर से भी कम खर्च में उम्र की जांच कर सकती हैं, जबकि बड़े पैमाने पर यह लागत कुछ सेंट तक सीमित हो सकती है।

फेस स्कैनिंग तकनीक की सटीकता बढ़ी

अमेरिका के National Institute of Standards and Technology के एक अध्ययन के अनुसार, चेहरे के आधार पर उम्र का अनुमान लगाने वाली तकनीक पहले की तुलना में अधिक सटीक हो गई है। 2014 में ऐसी प्रणालियों की औसत त्रुटि लगभग 4.1 वर्ष थी, जो 2024 तक घटकर 3.1 वर्ष रह गई और हाल के परीक्षणों में यह लगभग 2.5 वर्ष तक पहुंच गई है। कुछ कंपनियों का दावा है कि उनके नए मॉडल किशोरों की उम्र का अनुमान लगभग एक वर्ष की त्रुटि सीमा के भीतर लगा सकते हैं।

तकनीक के सामने अब भी कुछ चुनौतियां

हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तकनीक पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कुछ मामलों में यह अलग-अलग त्वचा रंग, कम गुणवत्ता वाली तस्वीरों या ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग जैसी स्थितियों में कम सटीक हो सकती है। इसके अलावा कुछ किशोर सिस्टम को धोखा देने के लिए नकली मूंछ, भारी मेकअप या मास्क का उपयोग करने जैसे तरीके भी अपनाते हैं। फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक ऑफलाइन दुनिया में शराब की दुकानों या बार में की जाने वाली उम्र जांच की तरह एक डिजिटल स्क्रीनिंग प्रक्रिया प्रदान कर सकती है।

ऑस्ट्रेलिया में शुरुआती असर दिखा

ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट नियामक के अनुसार, नए कानून के लागू होने के बाद से अब तक करीब 4.7 मिलियन संदिग्ध नाबालिग अकाउंट लॉक किए जा चुके हैं। सोशल मीडिया कंपनी Meta ने बताया कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर लगभग 5.5 लाख संदिग्ध अंडरएज अकाउंट हटाए हैं, जबकि Snapchat ने करीब 4.15 लाख अकाउंट बंद किए।

दूसरे देश भी कर रहे हैं निगरानी

अब कई देशों के नियामक ऑस्ट्रेलिया के अनुभव पर नजर रख रहे हैं। यूरोप और ब्रिटेन के नीति निर्माता भी सोशल मीडिया और एआई सेवाओं के लिए सख्त बाल सुरक्षा नियमों पर चर्चा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में उम्र सत्यापन से जुड़े नियम दुनिया भर में डिजिटल प्लेटफॉर्म की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।

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