बदलती जीवनशैली से बढ़ रहे स्लीप डिसऑर्डर, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

आज की तेज़ रफ्तार भरी जिंदगी और डिजिटल आदतों के कारण लोगों में नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नींद की कमी अब एक गंभीर चिंता का कारण बनती जा रही है। World Sleep Day के मौके पर डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम, अनियमित दिनचर्या, देर रात भोजन और बढ़ता मोटापा जैसे कारण स्वस्थ नींद के पैटर्न को प्रभावित कर रहे हैं।

नींद कोई विलासिता नहीं, शरीर की जरूरत

जो पीजीआई में स्लीप लैब के प्रभारी और Indian Association of Surgeons for Sleep Apnea के अध्यक्ष dr. Sandeep Bansal, ने कहा कि नींद कोई विलासिता नहीं बल्कि शरीर की जैविक आवश्यकता है। उनके अनुसार, पर्याप्त नींद स्वस्थ हृदय, मस्तिष्क और मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली की नींव होती है। नींद के दौरान शरीर कई जरूरी मरम्मत प्रक्रियाएं पूरी करता है, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी होती हैं। हालांकि, बढ़ता स्क्रीन एक्सपोजर, पढ़ाई का दबाव और अनियमित दिनचर्या के कारण खासकर युवाओं में नींद की कमी तेजी से बढ़ रही है।

नींद की कमी से बढ़ सकता है कई बीमारियों का खतरा

डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक नींद पूरी न होने से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग, कमजोर इम्यून सिस्टम और मानसिक क्षमता में गिरावट शामिल हैं। लगातार नींद की कमी शरीर के हार्मोनल संतुलन और मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करती है, जिससे स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।

डिजिटल उपकरण भी बन रहे बड़ी वजह

पंचकूला के Paras Health पल्मोनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ निदेशक dr. Amit Kumar Mandal , ने बताया कि मोबाइल फोन, टीवी और टैबलेट से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद के चक्र को प्रभावित करती है। यह रोशनी Melatonin नामक हार्मोन के स्राव को दबा देती है, जो शरीर के नींद-जागने के चक्र को नियंत्रित करता है। इसके कारण शरीर की प्राकृतिक Circadian Rhythm में देरी हो जाती है और नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है।

बच्चों पर भी दिख रहा असर

विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या अब बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है। देर रात तक मोबाइल या टीवी देखने की आदत और परिवार की अनियमित दिनचर्या के कारण बच्चों का सोने का समय लगातार पीछे खिसक रहा है। इसका असर बच्चों के ध्यान, मूड और पढ़ाई के प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है।

बिना सलाह के नींद की दवाओं से बचें

डॉक्टरों ने बिना चिकित्सकीय सलाह के नींद से जुड़ी दवाओं या सप्लीमेंट्स लेने से भी सावधान रहने की सलाह दी है। वही चंडीगढ़ की एक फर्टिलिटी विशेषज्ञ dr. Rakhi Goyal ने बताया कि लंबे समय तक नींद की कमी प्रजनन हार्मोन को प्रभावित कर सकती है। इससे पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है और तनाव का स्तर भी बढ़ सकता है।

मोटापा और स्लीप एपनिया भी बड़ी वजह

विशेषज्ञों ने बताया कि मोटापे से जुड़ी Obstructive Sleep Apnea भी खराब नींद की एक आम वजह बन रही है। Park Hospital में बैरिएट्रिक और मेटाबॉलिक सर्जन dr.Amit Garg का कहना है कि मोटापे के कारण सांस लेने में रुकावट की समस्या बढ़ती है, जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

अच्छी नींद के लिए विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी नींद के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं:

सोने और जागने का नियमित समय तय करें

सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें

शाम के बाद कैफीन का सेवन कम करें

हल्का और समय पर भोजन करें

नियमित व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें

डॉक्टरों के अनुसार, यदि नींद से जुड़ी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

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