पश्चिम एशिया तनाव: ओमान से अमेरिकी कर्मचारियों की वापसी

पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिका ने Oman में तैनात अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण यह कदम उठाया गया है। आदेश के तहत न केवल गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी ओमान छोड़ने को कहा गया है।

ओमान में खतरे को लेकर बढ़ी चिंता

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में हालिया घटनाओं और बढ़ते सैन्य टकराव को देखते हुए एहतियात के तौर पर यह निर्णय लिया गया है। पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में ड्रोन हमलों, मिसाइल हमलों और सैन्य गतिविधियों में तेजी आई है। इसी वजह से अमेरिकी प्रशासन ने अपने नागरिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला इस बात का संकेत है कि अमेरिका क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को गंभीरता से देख रहा है।

इराक में रिफ्यूलिंग विमान हादसा

तनावपूर्ण हालात के बीच Iraq में एक सैन्य विमान हादसे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। गुरुवार को इराक में एक रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। अमेरिकी रक्षा विभाग Pentagon ने मृतकों की पहचान सार्वजनिक कर दी है। मृत सैनिकों में मेजर जॉन ए. क्लिनर (33), कैप्टन एरियाना जी. सैविनो (31), टेक्निकल सार्जेंट एश्ले बी. प्रुइट (34), कैप्टन सेठ आर. कोवल (38), कैप्टन कर्टिस जे. एंगस्ट (30) और टेक्निकल सार्जेंट टायलर एच. सिमंस (28) शामिल हैं। पेंटागन के अनुसार दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सामने आएगी।

संघर्ष में बढ़ती हताहतों की संख्या

अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार ईरान से जुड़े संघर्ष में अब तक कम से कम 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा अलग-अलग सैन्य अभियानों में सात अन्य सैनिक भी मारे गए हैं। वहीं पेंटागन ने बताया कि करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें आठ की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि क्षेत्र में चल रहा संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है।

ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर लगाए आरोप

इस बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर नए आरोप लगाए हैं। ईरान के सैन्य मुख्यालय Khatam al-Anbiya Central Headquarters का कहना है कि अमेरिका और इजरायल क्षेत्र में हमलों के लिए ईरानी ड्रोन की नक़ल का इस्तेमाल कर रहे हैं। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक हमलों में शाहेद और लुकास जैसे ड्रोन मॉडल को कॉपी किया जा रहा है और फिर इन हमलों का आरोप ईरानी सेना पर लगाया जा रहा है। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB को जारी बयान में कहा गया कि यह रणनीति ईरान की सैन्य कार्रवाई को बदनाम करने के लिए अपनाई जा रही है।

पड़ोसी देशों में भी बढ़ी सुरक्षा चिंता

ईरानी बयान में दावा किया गया कि हाल के दिनों में Turkey, Kuwait और इराक में कई हमले हुए हैं, जिनका आरोप ईरान पर लगाया गया। ईरान का कहना है कि इन घटनाओं का उद्देश्य तेहरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच अविश्वास पैदा करना है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

कुवैत में ड्रोन और मिसाइल हमले

इस बीच कुवैत में भी सुरक्षा हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। Kuwait National Guard ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में उसने पांच ड्रोन मार गिराए हैं। कुवैती अधिकारियों के अनुसार कुछ ड्रोन ने Kuwait International Airport को निशाना बनाने की कोशिश की, जिससे वहां के रडार सिस्टम का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा दो मिसाइलों ने Ahmad Al-Jaber Air Base के आसपास हमला किया। इस हमले में तीन सैनिक घायल हो गए।

क्षेत्रीय स्थिरता पर बढ़ती चिंता

पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की जा रही है।

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