दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर सख्ती

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत Commission for Air Quality Management (सीएक्यूएम) की सुरक्षा और प्रवर्तन उप-समिति ने अपनी 24वीं बैठक आयोजित की। बैठक में एनसीआर राज्यों, दिल्ली सरकार और पंजाब सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रदूषण नियंत्रण उपायों और प्रवर्तन कार्रवाइयों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आयोग द्वारा जारी निर्देशों, सलाहों और आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन हो और विभिन्न एजेंसियां मिलकर प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं।

वाहन प्रदूषण पर विशेष निगरानी

बैठक के दौरान वाहन प्रदूषण से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली और एनसीआर के शहरों में ट्रैफिक जाम वाले प्रमुख स्थानों और चौराहों की पहचान की जा रही है, ताकि वहां वाहनों की लंबी कतारों से होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके। इसके साथ ही एमसीडी सीमा के प्रवेश बिंदुओं पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों की स्थापना और संचालन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इन कैमरों के जरिए प्रतिबंधित और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बैठक में यह भी बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ प्रवर्तन अभियान जारी है।

डीजल ऑटो-रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना

सीएक्यूएम ने यह भी समीक्षा की कि एनसीआर जिलों में डीजल ऑटो-रिक्शा को पूरी तरह बंद करने की दिशा में क्या प्रगति हुई है। आयोग के निर्देशों के अनुसार 31 दिसंबर 2026 तक डीजल ऑटो को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह सीएनजी या ई-ऑटो आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा मोटर वाहन एग्रीगेटर कंपनियों, डिलीवरी सेवा प्रदाताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा स्वच्छ गतिशीलता (क्लीन मोबिलिटी) अपनाने की दिशा में किए गए प्रयासों की भी समीक्षा की गई।

सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण

बैठक में सड़क की धूल और निर्माण व विध्वंस (C&D) गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर भी चर्चा हुई। आयोग ने शहरी स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि अतिरिक्त मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की खरीद की जाए और अधिक धूल वाले क्षेत्रों में नियमित सफाई अभियान चलाया जाए। इसके अलावा निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट के संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण की व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा पुनर्चक्रित उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

पराली जलाने की रोकथाम पर तैयारियां

बैठक में पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए भी राज्यों द्वारा की जा रही तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि गेहूं के अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए नई निगरानी व्यवस्था और जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में ईंट भट्टों में धान के भूसे से बने बायोमास पेलेट्स के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देशों के पालन की स्थिति पर भी चर्चा हुई।

कचरा प्रबंधन और लैंडफिल आग पर ध्यान

बैठक में दिल्ली-एनसीआर में नगरपालिका ठोस कचरे (MSW) के प्रबंधन और पुराने कचरे के निपटान की स्थिति की भी समीक्षा की गई। आयोग ने संबंधित एजेंसियों से कहा कि कचरा प्रसंस्करण अवसंरचना की क्षमता बढ़ाई जाए और लैंडफिल स्थलों पर आग लगने की घटनाओं तथा खुले में कचरा जलाने को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

उद्योगों और वायु गुणवत्ता निगरानी पर जोर

सीएक्यूएम ने उद्योगों में कड़े उत्सर्जन मानकों के पालन और एनसीआर के जिलों में सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। बैठक में यह भी तय किया गया कि विभिन्न एजेंसियां समय-समय पर निरीक्षण करेंगी और प्रदूषण नियंत्रण उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेंगी।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए एजेंसियों की प्रतिबद्धता

बैठक के अंत में सभी संबंधित एजेंसियों ने यह भरोसा दिलाया कि वे वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों की नियमित समीक्षा और सख्त प्रवर्तन सुनिश्चित करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन उपायों को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो आने वाले समय में दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।

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