वैश्विक मानकों के अनुरूप बने भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली: पीयूष गोयल

नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री PiyushGoyal ने देश की उच्च शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को आकर्षित करने पर जोर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित एक कुलपति सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालयों से पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने और नई उभरती प्रौद्योगिकियों को शिक्षा प्रणाली में शामिल करने का आह्वान किया।

नई तकनीकों को अपनाने पर जोर

अपने संबोधन में पीयूष गोयल ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में उच्च शिक्षा संस्थानों को समय के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग जैसी उभरती तकनीकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की अपील की, ताकि छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल मिल सके। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा से न केवल छात्रों की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत वैश्विक शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को आकर्षित करने की जरूरत

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में दुनिया भर के छात्रों को आकर्षित करने की बड़ी क्षमता है। इसके लिए विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम, शोध और नवाचार पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि भारतीय विश्वविद्यालय वैश्विक मानकों के अनुसार अपने कार्यक्रम तैयार करें, तो देश में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी और भारत एक प्रमुख ग्लोबल एजुकेशन हब के रूप में उभर सकता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख

इस अवसर पर पीयूष गोयल ने National Education Policy 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नीति व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है। इस नीति को तैयार करने के दौरान देश और विदेश से लगभग तीन लाख सुझाव प्राप्त हुए थे, जिनके आधार पर शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा तय की गई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने का रास्ता खोला है।

शिक्षा में वैश्विक प्रतिस्पर्धा की तैयारी

पीयूष गोयल ने विश्वविद्यालयों से शोध, नवाचार और उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिक्षा संस्थानों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना होगा।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि विश्वविद्यालय आधुनिक तकनीक और नवाचार पर ध्यान देंगे, तो भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली दुनिया के अग्रणी देशों के बराबर खड़ी हो सकेगी।

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