पीएम मोदी ने युवाओं की शक्ति को सराहा

PM addressing at the inauguration and foundation stone laying of various projects at Madurai, in Tamil Nadu on March 01, 2026.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की युवा शक्ति की सराहना करते हुए कहा है कि भारत के युवाओं का आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प ही देश को नए शिखर तक पहुंचा रहा है। उन्होंने अपने हालिया संदेश में इच्छाशक्ति और आत्मनिर्णय की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि आज का भारत अपने सपनों को साकार करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने लिखा कि भारत की युवाशक्ति जो ठान लेती है, उसे पूरा करके दिखाती है। उनके अनुसार, यही जज़्बा देश के विकास की सबसे बड़ी ऊर्जा है।

युवाओं के संकल्प पर भरोसा

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत के युवा आज आत्मविश्वास से भरे हुए हैं और नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी का दृढ़ निश्चय ही भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रहा है। पीएम का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश में स्टार्टअप, नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और कौशल विकास को लेकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ी है। केंद्र सरकार भी लंबे समय से युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में लाने पर जोर देती रही है।

संस्कृत सुभाषित के माध्यम से प्रेरणा

अपने संदेश के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। श्लोक के माध्यम से उन्होंने आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति की शक्ति का संदेश दिया। सुभाषित का भावार्थ है कि यदि व्यक्ति में मजबूत इच्छाशक्ति हो तो कोई भी बाधा उसके रास्ते को रोक नहीं सकती। पर्वत जैसी बड़ी रुकावटें भी उसके संकल्प के सामने छोटी पड़ जाती हैं। प्रधानमंत्री ने इस श्लोक के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि आत्मनिर्णय और सकारात्मक सोच से व्यक्ति असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल कर सकता है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

दिसंबर 2025 से प्रधानमंत्री समय-समय पर संस्कृत सुभाषित साझा कर रहे हैं। उनका उद्देश्य भारतीय परंपरा के कालजयी ज्ञान को समकालीन शासन और जन-संवाद से जोड़ना बताया जाता है। प्रधानमंत्री अपने भाषणों, ‘मन की बात’ कार्यक्रम और सोशल मीडिया पोस्ट में अक्सर संस्कृत श्लोकों का उल्लेख करते हैं। इससे वे प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक नीतियों और विकास कार्यक्रमों से जोड़ने का प्रयास करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संदर्भों के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत और समकालीन शासन के बीच संवाद स्थापित किया जाता है।

शासन की प्राथमिकताओं से जुड़ाव

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए जा रहे संस्कृत सुभाषितों में अक्सर विकास, नैतिक नेतृत्व, स्थिरता, लैंगिक समानता और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व जैसे विषयों की झलक मिलती है। 8 दिसंबर को साझा किए गए एक पूर्व सुभाषित में उन्होंने भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन में संस्कृत भाषा की स्थायी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला था। विश्लेषकों के अनुसार, यह पहल भारतीय सभ्यता की विरासत को समकालीन नीतिगत विमर्श का हिस्सा बनाने की दिशा में एक प्रयास है।

युवाओं को संदेश: आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी

प्रधानमंत्री के ताजा संदेश का केंद्र बिंदु युवाओं में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को मजबूत करना है। उन्होंने संकेत दिया कि देश का भविष्य युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और संकल्प पर निर्भर है। आज भारत वैश्विक मंच पर तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में युवाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री का संदेश इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें वे युवा शक्ति को राष्ट्र की प्रगति का मुख्य आधार बता रहे हैं।

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