नई दिल्ली: सीमा पार नदियों पर सहयोग को मजबूत करने और भारत-भूटान साझेदारी के तहत चल रही प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन विभाग के सचिव वीएल कंथा राव के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में भूटान का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल में केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ असम और पश्चिम बंगाल के राज्य प्रतिनिधि तथा WAPCOS Limited के अधिकारी भी शामिल थे।
25 फरवरी 2026 को आयोजित सचिव स्तरीय बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने बाढ़ प्रबंधन और बाढ़ पूर्वानुमान के क्षेत्र में मौजूदा सहयोग तंत्र की समीक्षा की। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सीमा पार नदियों से जुड़े जल-मौसम विज्ञान अवलोकन नेटवर्क को और सुदृढ़ किया जाए। डेटा साझाकरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने, रियल-टाइम सूचना आदान-प्रदान को बेहतर करने और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन, हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ (GLOF) और चरम मौसम की घटनाओं से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
भूटान के ऊर्जा मंत्री से मुलाकात
द्विपक्षीय बैठक के बाद भारतीय सचिव ने भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री Lyonpo Gem Tshering से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों पक्षों ने ऊर्जा सहयोग, जल संसाधन प्रबंधन और दीर्घकालिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
पुनात्सांगचू जलविद्युत परियोजनाओं का निरीक्षण
प्रतिनिधिमंडल ने 26 फरवरी 2026 को भूटान में निर्माणाधीन Punatsangchhu-I Hydroelectric Project और हाल ही में शुरू हुई Punatsangchhu-II Hydroelectric Project का दौरा किया। इन परियोजनाओं को भारत-भूटान सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। अधिकारियों ने परियोजना स्थलों पर कार्य प्रगति का आकलन किया और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। जलविद्युत परियोजनाएं न केवल भूटान की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करती हैं, बल्कि भारत के लिए भी स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
जल विज्ञान एवं बाढ़ निगरानी केंद्रों का अवलोकन
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने थिम्फू स्थित National Center for Hydrology and Meteorology (एनसीएचएम) का भी दौरा किया। यहां जल विज्ञान और मौसम संबंधी आंकड़ों के संकलन एवं विश्लेषण की प्रणाली की समीक्षा की गई। इसके अलावा, चामगांग में 3.5 एमएलडी क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र और वांगडू फोड्रंग जोंग के पास स्थित बाढ़ निगरानी केंद्र का निरीक्षण भी किया गया। इन स्थलों पर आधुनिक उपकरणों और निगरानी प्रणालियों के जरिए बाढ़ पूर्वानुमान और जल प्रबंधन को मजबूत करने के प्रयासों को देखा गया।
साझा नदी बेसिन प्रबंधन पर जोर
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य साझा नदी बेसिनों में जल संसाधन प्रबंधन को और प्रभावी बनाना था। भारत और भूटान के बीच बहने वाली नदियों के संदर्भ में समय पर डेटा साझा करना और बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारी बढ़ाना दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों ने इस बात की पुष्टि की कि सीमा पार जल संसाधनों का प्रबंधन सतत, पारस्परिक रूप से लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल होना चाहिए।
दीर्घकालिक सहयोग की दिशा में कदम
भारत और भूटान के बीच जल और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। यह दौरा इसी साझेदारी को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए क्षेत्रीय सहयोग और तकनीकी समन्वय भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। इस उच्चस्तरीय दौरे ने यह स्पष्ट किया कि दोनों देश साझा जल संसाधनों के सतत उपयोग और आपदा जोखिम में कमी के लिए प्रतिबद्ध हैं।
