इजरायल पहुंचा UPI, डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा

भारत और इजरायल ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए अहम कदम उठाया है। गुरुवार को दोनों देशों ने यूपीआई के सीमापार उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। भारत की इस पहल सेयूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली को इजरायल के घरेलू भुगतान ढांचे से जोड़ा जाएगा, जिससे सीमा पार लेनदेन अधिक तेज, सुरक्षित और किफायती बन सकेंगे। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने इजरायल दौरे के दूसरे और अंतिम दिन इस समझौते पर संतोष जताते हुए कहा कि इजरायल में यूपीआई के उपयोग को लेकर बनी सहमति दोनों देशों के कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित होगी।

व्यापार और स्टार्टअप्स को मिलेगा लाभ

सीमापार डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलने से भारत और इजरायल के बीच व्यापारिक लेनदेन सरल होंगे। खासकर छोटे और मध्यम उद्यम (MSME), स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों को भुगतान निपटान में तेजी और कम लागत का लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट इंटरऑपरेबिलिटी से दोनों देशों के बीच ई-कॉमर्स, पर्यटन और सेवा क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे भुगतान के पारंपरिक और महंगे तरीकों पर निर्भरता कम होगी।

उभरती तकनीकों में रणनीतिक सहयोग

यूपीआई समझौते के साथ ही दोनों देशों ने ‘क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पार्टनरशिप’ स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तकनीकी सहयोग भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में दोनों देशों को मजबूत बनाएगा। यह साझेदारी अनुसंधान, नवाचार और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी खोलेगी।

परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और कृषि में सहयोग

दोनों देशों ने नागरिक परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग को गहरा करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में आधुनिक और भविष्य-उन्मुख समाधान विकसित करने पर भी जोर दिया गया। ग्रामीण विकास और “उत्कृष्ट गांव” की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए साझा प्रयासों की बातचीत हुई। इजरायल अपनी उन्नत कृषि तकनीकों के लिए जाना जाता है, जबकि भारत का विशाल कृषि बाजार सहयोग के लिए व्यापक संभावनाएं प्रदान करता है।

यूपीआई: भारत का सफल डिजिटल मॉडल

यूपीआई ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदल दी है। यह एक सार्वजनिक, इंटरऑपरेबल और सुरक्षित भुगतान ढांचा है, जिसने डिजिटल लेनदेन को आसान और सुलभ बनाया है। वर्तमान में यूपीआई का उपयोग आठ से अधिक देशों—United Arab Emirates, Singapore, Bhutan, Nepal, Sri Lanka, France, Mauritius और Qatar—में किया जा रहा है। इजरायल के जुड़ने से यह सूची और विस्तृत होगी। भारत के वित्त मंत्रालय द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार, देश में कुल भुगतान लेनदेन का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा यूपीआई के माध्यम से होता है। यह नकद लेनदेन (करीब 38 प्रतिशत) से आगे निकल चुका है। इसकी सफलता का मुख्य कारण उपयोग में सरलता, त्वरित भुगतान सुविधा और व्यापक स्वीकार्यता है।

डिजिटल कूटनीति का विस्तार

भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है। यूपीआई के सीमापार विस्तार को डिजिटल कूटनीति के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत-इजरायल संबंधों को केवल राजनीतिक और रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को भी नई ऊंचाई देगा।दोनों देशों के बीच यह पहल भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के निर्माण में एक मजबूत आधार साबित हो सकती है।

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