इजरायल के नेसेट में पीएम मोदी का संबोधन

PM addresses the Knesset of Israel on February 25, 2026.

यरुशलम: नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इजरायल की संसद Knesset में ऐतिहासिक संबोधन दिया अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत ने भी दशकों तक आतंकवाद का दर्द झेला है और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वह पूरी मजबूती के साथ इजरायल के साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन कई मायनों में महत्वपूर्ण है किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का नेसेट में यह पहला औपचारिक संबोधन था।

7 अक्टूबर हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि

अपने भाषण की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर को हुए हमास हमले में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे 1.4 अरब भारतीयों की ओर से शोक और एकजुटता का संदेश लेकर आए हैं। “हम आपका दर्द समझते हैं। इस कठिन समय में भारत पूरी दृढ़ता से आपके साथ है,” प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद मानवता के खिलाफ अपराध है और इसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

‘आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई’

पीएम ने कहा कि भारत स्वयं लंबे समय तक आतंकवादी हमलों का सामना करता रहा है। इस अनुभव ने भारत को यह सिखाया है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुटता जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ हर मोर्चे पर इजरायल के साथ सहयोग को तैयार है।

गाजा शांति पहल पर भारत का रुख

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने गाजा से जुड़े हालात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित शांति पहल क्षेत्र में स्थायी समाधान की दिशा दिखाती है। “आशा को बनाए रखना आवश्यक है” और न्यायपूर्ण एवं टिकाऊ शांति ही क्षेत्र के सभी लोगों—फिलिस्तीन सहित—के हित में है। भारत ने इस पहल का समर्थन किया है और संवाद के माध्यम से समाधान का पक्षधर है।

भारत-इजरायल संबंधों पर विशेष टिप्पणी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें इजरायल से विशेष जुड़ाव महसूस होता है। क्योंकि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था—उसी दिन भारत ने औपचारिक रूप से इजरायल को मान्यता दी थी। वे भारत की ओर से मित्रता, सम्मान और साझेदारी का संदेश लेकर आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक, रक्षा, तकनीकी और आर्थिक संबंधों को और गहराई दे सकती है।

होलोकॉस्ट और मानवीय मूल्यों का उल्लेख

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में होलोकॉस्ट को मानव इतिहास का एक बेहद दुखद और अंधकारमय अध्याय बताया। उन्होंने गुजरात के नवानगर के महाराजा—जिन्हें जाम साहब के नाम से जाना जाता है—का उल्लेख किया, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के शरणार्थी बच्चों, जिनमें कई यहूदी बच्चे भी शामिल थे, को आश्रय दिया था। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की मानवीय परंपरा और वैश्विक जिम्मेदारी का उदाहरण बताया।

भारत में यहूदी समुदाय का सम्मान

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में यहूदी समुदाय सदियों से बिना किसी भेदभाव या उत्पीड़न के भय के साथ रहता आया है। उन्होंने इसे भारत की बहुलतावादी और समावेशी संस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत विविधता में एकता की भावना को मजबूत मानता है और सभी समुदायों के प्रति सम्मान रखता है।

नेसेट में जोरदार स्वागत

संसद में प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। कई सांसदों ने तालियों से उनका अभिनंदन किया। इजरायल के नेसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने हिंदी में उनका स्वागत किया और इस यात्रा को ऐतिहासिक बताया। सदन में “मोदी, मोदी” के नारे भी सुनाई दिए, जो दोनों देशों के बढ़ते संबंधों का संकेत माने जा रहे हैं।

ऐतिहासिक और कूटनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री का यह संबोधन भारत-इजरायल संबंधों के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। रक्षा सहयोग, कृषि तकनीक, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में दोनों देश पहले से मिलकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में सीधे संवाद से द्विपक्षीय संबंधों को नई राजनीतिक और प्रतीकात्मक मजबूती मिली है।

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