नई दिल्ली: Dharmendra Pradhan ने कहा है कि शिक्षकों को सशक्त बनाने और शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक परिवर्तनकारी साधन बनकर उभरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में एआई कोई विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। शिक्षा मंत्री मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे थे, जिसमें Bharti Airtel Foundation और CK-12 Foundation के बीच शैक्षणिक सहयोग की पहल की घोषणा की गई।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की दिशा
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि National Education Policy 2020 ने देश में शिक्षा सुधार के लिए स्पष्ट रोडमैप दिया है। इस नीति का उद्देश्य शिक्षा को समावेशी, लचीला और तकनीक-आधारित बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि शिक्षकों को हर स्तर पर सहयोग दिया जाए, ताकि वे बदलते शैक्षणिक वातावरण के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें।
शिक्षकों के लिए गुणवत्तापूर्ण संसाधनों की जरूरत
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आज के समय में प्रत्येक कक्षा और प्रत्येक विद्यार्थी की जरूरतें अलग हैं। ऐसे में शिक्षकों को ऐसे डिजिटल और इंटरैक्टिव संसाधनों की आवश्यकता है, जो व्यक्तिगत सीखने की गति और शैली के अनुसार सामग्री उपलब्ध करा सकें। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित उपकरणों से न केवल शिक्षण प्रक्रिया प्रभावी होती है, बल्कि छात्रों की समझ और भागीदारी भी बढ़ती है।
शिक्षा में नया बदलाव
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा के क्षेत्र में कई संभावनाएं खोल रहा है। एआई की मदद से छात्रों की सीखने की प्रगति का विश्लेषण किया जा सकता है, कमजोर क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है और उसी के अनुरूप पाठ्य सामग्री तैयार की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई आधारित प्लेटफॉर्म शिक्षकों को पाठ योजना बनाने, मूल्यांकन करने और छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान करने में सहायता कर सकते हैं। उनके अनुसार, “तकनीक का सही उपयोग शिक्षकों को अधिक सक्षम बनाता है, उनका स्थान नहीं लेता।”
साझेदारी से क्या होगा लाभ?
कार्यक्रम में भारती एयरटेल फाउंडेशन और सीके-12 फाउंडेशन के बीच सहयोग का उद्देश्य डिजिटल शिक्षा संसाधनों को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है। सीके-12 फाउंडेशन ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज उपलब्ध कराने के लिए जानी जाती है। इस साझेदारी से उम्मीद है कि भारतीय छात्रों और शिक्षकों को इंटरैक्टिव, किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध होगी। इस पहल से खासतौर पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को लाभ मिलने की संभावना है।
डिजिटल समानता पर जोर
प्रधान ने कहा कि तकनीक का विस्तार केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक डिजिटल संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि डिजिटल डिवाइड को कम किया जाए और हर बच्चे को समान अवसर मिले।
मानव और तकनीक का संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के भविष्य में तकनीक और मानवीय मार्गदर्शन का संतुलन महत्वपूर्ण होगा। एआई शिक्षकों का सहयोगी बन सकता है, लेकिन शिक्षा का मूल आधार शिक्षक-छात्र संवाद ही रहेगा। प्रधान ने भी इस बात पर बल दिया कि तकनीक का उद्देश्य शिक्षकों को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उन्हें अधिक प्रभावी बनाना है।
