2030 तक 300 अरब डॉलर के करीब पहुंच सकता है भारत का ई-कॉमर्स बाजार

नई दिल्ली: भारत का ई-कॉमर्स बाजार आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। ताज़ा उद्योग रिपोर्ट के मुताबिक, देश का कुल ई-कॉमर्स बाजार वर्ष 2030 तक 280 से 300 अरब डॉलर के स्तर को छू सकता है। वर्तमान में इसका आकार लगभग 120 से 140 अरब डॉलर के बीच आंका गया है। वैश्विक कंसल्टिंग फर्म Boston Consulting Group (बीसीजी) की ओर से जारी रिपोर्ट में उपभोक्ता व्यवहार, डिजिटल पहुंच और रिटेल संरचना में हो रहे बदलावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

ऑफलाइन रिटेल मजबूत

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ई-कॉमर्स की तेज वृद्धि के बावजूद पारंपरिक ऑफलाइन रिटेल बाजार अपनी मजबूती बनाए हुए है। पिछले चार वर्षों में ऑफलाइन रिटेल सेक्टर 13-14 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा है। इसका मतलब यह है कि भारत में डिजिटल और फिजिकल रिटेल के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व का नया मॉडल उभर रहा है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन का नया संतुलन

विश्लेषण के अनुसार, भारतीय बाजार अब ऐसे चरण में प्रवेश कर चुका है जहां ग्राहक स्क्रीन और स्टोर के बीच सहज रूप से आवाजाही कर रहे हैं। करीब 50 % ऑफलाइन खरीदार किसी उत्पाद को खरीदने से पहले ऑनलाइन जानकारी जुटाते हैं। इसे ‘मल्टी-चैनल’ या ‘ओम्नी-चैनल’ खरीदारी का ट्रेंड कहा जा रहा है।यह दर्शाता है कि ग्राहक अब केवल कीमत नहीं, बल्कि सुविधा, भरोसा और अनुभव को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।

2030 तक 44 करोड़ ऑनलाइन खरीदार

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल भारत में लगभग 30 करोड़ लोग ऑनलाइन खरीदारी करते हैं। यह संख्या 2030 तक बढ़कर 44 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा ऑनलाइन खरीदारों में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रामीण भारत की है। डिजिटल कनेक्टिविटी और सस्ती इंटरनेट सेवाओं ने छोटे शहरों और गांवों में भी ई-कॉमर्स की पहुंच बढ़ाई है।

ई-रिटेल और ई-सेवाओं का विस्तार

ई-कॉमर्स बाजार को दो प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है—ई-रिटेल और ई-सेवाएं।

ई-रिटेल का मौजूदा अनुमानित मूल्य 75 से 85 अरब डॉलर है।

ई-सेवाओं का आकार 45 से 55 अरब डॉलर के बीच है।

अनुमान है कि ई-सेवाएं 20-22 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ेंगी, जबकि ई-रिटेल 16-18 प्रतिशत की गति से विस्तार करेगा। ई-सेवाओं में ऑनलाइन ट्रैवल, फूड डिलीवरी, डिजिटल सब्सक्रिप्शन और अन्य सेवा-आधारित प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

उपभोक्ता व्यवहार में बड़ा बदलाव

देश के विभिन्न हिस्सों से 12,000 से अधिक उपभोक्ताओं पर किए गए सर्वेक्षण के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में बताया गया है कि खरीदारी का व्यवहार तेजी से बदल रहा है। ग्राहक अब सुविधा, विश्वसनीयता और आवश्यकता के अनुसार ऑनलाइन और ऑफलाइन विकल्पों के बीच चयन करते हैं। कई उपभोक्ता ऑनलाइन खोज करते हैं, लेकिन अंतिम खरीदारी स्टोर से करते हैं। ये ट्रेंड बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब केवल खरीदारी का माध्यम नहीं, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

महिला उपभोक्ताओं का बढ़ता भरोसा

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि लगभग दो-तिहाई महिला खरीदार ऑनलाइन खरीदारी को अधिक सुरक्षित मानती हैं। गोपनीयता, घर बैठे सुविधा और समय की बचत जैसे कारणों ने महिला उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाया है। इससे ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए महिला-केंद्रित उत्पाद और सेवाओं का दायरा बढ़ाने के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

क्विक और सोशल कॉमर्स की रफ्तार

क्विक कॉमर्स सेगमेंट ने बीते वर्षों में 100 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की है। इससे तत्काल और छोटी अवधि की खरीदारी मुख्यधारा का हिस्सा बन गई है। वहीं सोशल और चैट कॉमर्स सेगमेंट 40-45 प्रतिशत की CAGR से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप के जरिए उत्पादों की बिक्री अब तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

ब्रांड्स की ग्रोथ हुई तेज

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने नए ब्रांड्स की ग्रोथ को तेज कर दिया है। पहले किसी ब्रांड को 100 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व तक पहुंचने में औसतन 11 साल लगते थे। अब यह समय घटकर करीब 7 साल रह गया है। इससे साफ है कि डिजिटल इकोसिस्टम ने उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए विकास के नए रास्ते खोले हैं।

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