पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय का निधन, राजनीतिक जगत में शोक की लहर

वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय के निधन से देश की राजनीति में एक लंबे अध्याय का अंत हो गया है। मुकुल रॉय का सोमवार देर रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे और लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुकुल रॉय के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि उनका जाना सार्वजनिक जीवन के लिए एक क्षति है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुकुल रॉय को उनके व्यापक राजनीतिक अनुभव और समाज सेवा के प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उनके परिजनों और समर्थकों के प्रति संवेदना जताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की। पीएम मोदी के संदेश को राजनीतिक परिपक्वता और सम्मान की भावना के रूप में देखा जा रहा है।

भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने दी श्रद्धांजलि

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने भी मुकुल रॉय के निधन पर दुख जताया। सुवेंदु अधिकारी बताया कि मुकुल रॉय एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता थे, जिनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद और महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मुकुल रॉय के निधन को बंगाल की राजनीति के एक युग का अंत बताया। उन्होंने कहा कि मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक स्तंभों में से एक थे और पार्टी को शुरुआती दौर में मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही।

लंबा राजनीतिक सफर और कई अहम भूमिकाएं

मुकुल रॉय का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन वे हमेशा चर्चा में बने रहे। वे तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और लंबे समय तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान उन्होंने रेल मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। उस समय उन्होंने संगठनात्मक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई।

भाजपा में शामिल होने और वापसी की कहानी

2017 में मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नादिया जिले के कृष्णानगर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। हालांकि, कुछ महीनों बाद वे फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। यह राजनीतिक घटनाक्रम काफी चर्चा में रहा और बंगाल की राजनीति में इसे एक अहम मोड़ माना गया।

बीमारी से लंबी जंग, अस्पताल में हुआ निधन

मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की। परिवार के अनुसार, वे लंबे समय से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो पा रहा था। करीबी सहयोगियों का कहना है कि बीमारी के बावजूद मुकुल रॉय राजनीति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े मामलों में रुचि लेते रहे, लेकिन बीते कुछ समय से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी।

राजनीतिक विरासत और यादें

मुकुल रॉय को एक कुशल रणनीतिकार, संगठनकर्ता और प्रभावशाली वक्ता के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक भूमिकाओं में रहते हुए बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति पर अपनी छाप छोड़ी। उनके निधन को राजनीति से ऊपर उठकर सभी दलों ने एक व्यक्तिगत और सार्वजनिक क्षति के रूप में देखा है। उनका योगदान आने वाले समय में भी राजनीतिक चर्चाओं में संदर्भ के रूप में लिया जाता रहेगा।

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