ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच 28 फरवरी को मुलाकात होने की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।
इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बैठक ऐसे समय हो सकती है जब ईरान को लेकर अमेरिका कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सैन्य तैयारियों को भी आगे बढ़ा रहा है।
दोनों मोर्चों पर कूटनीति और दबाव
हाल ही में स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई। इस बैठक में वॉशिंगटन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अपनी चिंताएं स्पष्ट की हैं बातचीत से जुड़े एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी बताया की, इन चिंताओं को कम करने के लिए ईरान ने एक लिखित प्रस्ताव (written proposal) तैयार करने पर सहमति जताई है। जिसमें तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बड़े टकराव को रोकने के लिए संभावित कदमों की रूपरेखा तैयार की गई है।
मार्को रुबियो की केंद्रीय भूमिका
विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी नीतियों के समन्वय में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मौजूदा प्रशासन में वे केवल विदेश नीति ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णयों में भी प्रभावशाली भूमिका में हैं। अमेरिकी रणनीति का फोकस एक ओर कूटनीतिक समाधान तलाशने पर है, तो दूसरी ओर यह संदेश देना भी है कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो सैन्य विकल्प भी खुले हैं।
व्हाइट हाउस में सैन्य विकल्पों पर मंथन
इजरायली मीडिया के अनुसार, बुधवार को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ईरान को लेकर एक अहम बैठक की। इस बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि किसी संभावित सैन्य अभियान के लिए आवश्यक “सभी बल” मार्च के मध्य तक तैनात किए जा सकते हैं। यह जानकारी ऐसे समय आई है, जब क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर बढ़ गई है।
इस हफ्ते के अंत तक स्ट्राइक की संभावना?
इजरायली चैनल i24 ने CBS News के हवाले से बताया जा रहा है कि वरिष्ठ अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अवगत कराया है कि अमेरिकी सेना इस हफ्ते के अंत तक ईरान पर संभावित स्ट्राइक के लिए तैयार हो सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का फैसला शनिवार या रविवार के बाद भी लिया जा सकता है। फिलहाल राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
मध्य पूर्व से कर्मचारियों की आंशिक निकासी
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन की मानक योजना (standard contingency planning) के तहत कुछ अमेरिकी कर्मचारियों को अगले कुछ दिनों में मध्य पूर्व के संवेदनशील इलाकों से बाहर निकाला जा सकता है। इस कदम का मकसद संभावित सैन्य कार्रवाई या ईरान की ओर से जवाबी हमले की स्थिति में अमेरिकी कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
नेतन्याहू का सख्त रुख
बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका की यात्रा पर गए थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की। उस दौरान नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में केवल न्यूक्लियर गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा जाना चाहिए बल्कि उनका कहना था कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं और हमास तथा हिज़्बुल्लाह जैसे क्षेत्रीय प्रॉक्सी संगठनों को दी जा रही फंडिंग को भी किसी भी समझौते में शामिल किया जाना जरूरी है।
हालात आगे क्या संकेत देते हैं
मौजूदा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि अमेरिका और इजरायल दोनों ईरान के मुद्दे पर समन्वित रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक ओर कूटनीतिक बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर सैन्य तैयारियों की खबरें क्षेत्रीय तनाव को और गंभीर बनाती दिख रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में होने वाली अमेरिका–इजरायल उच्चस्तरीय बातचीत इस बात की दिशा तय कर सकती है कि पश्चिम एशिया में हालात टकराव की ओर बढ़ेंगे या किसी समझौते की राह निकलेगी।
