बेंगलुरु में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे फ्रांस की रक्षा मंत्री के साथ संवाद

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक अहम कदम आज बेंगलुरु में उठाया जा रहा है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वाउटरिन छठी भारत–फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद की संयुक्त रूप से अध्यक्षता करेंगे। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग के मौजूदा ढांचे की व्यापक समीक्षा की जाएगी।

रक्षा सहयोग के हर पहलू पर चर्चा

इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को रणनीतिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाना है। बैठक में सैन्य सहयोग, रक्षा उत्पादन, तकनीकी साझेदारी, संयुक्त अभ्यास और अधिकारियों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, भारत और फ्रांस के बीच मौजूदा रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए नवीनीकृत किए जाने की प्रबल संभावना है। यह समझौता दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को मजबूती देगा और रक्षा क्षेत्र में निरंतर सहयोग का आधार बनेगा।

HAMMER मिसाइल निर्माण पर अहम MoU संभव

बैठक का एक महत्वपूर्ण एजेंडा भारत में HAMMER मिसाइलों के निर्माण से जुड़ा समझौता ज्ञापन (MoU) भी है। यदि इस पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को सीधा समर्थन देगा। इस कदम से न केवल रक्षा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को अत्याधुनिक तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।

सैन्य अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती पर घोषणा की उम्मीद

भारत और फ्रांस की सेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करने और के लिए दोनों देशों के थल सेना प्रतिष्ठानों में अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती को लेकर भी एक औपचारिक घोषणा होने की संभावना है।यह व्यवस्था दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण पद्धतियों और रणनीतिक दृष्टिकोण को बेहतर ढंग से समझने में सहायक होगी।

टाटा–एयरबस H-125 परियोजना का वर्चुअल उद्घाटन

दोनों रक्षा मंत्री एक और महत्वपूर्ण कार्यक्रम के साक्षी बनेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कर्नाटक में स्थापित टाटा–एयरबस H-125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना भारत में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है और इससे भारत–फ्रांस औद्योगिक सहयोग को ठोस आधार मिलेगा।

भारत–फ्रांस संबंधों में रक्षा क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका

भारत और फ्रांस के संबंधों में रक्षा सहयोग हमेशा से एक मजबूत स्तंभ रहा है। बीते वर्षों में दोनों देशों के बीच हुए उच्चस्तरीय आदान-प्रदानों ने इस साझेदारी को और गहराई दी है। वर्ष 2024–25 के दौरान रणनीतिक संवाद, रक्षा सौदे और संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों देश वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण रखते हैं।

ऐतिहासिक राजनयिक क्षण

भारत–फ्रांस रिश्तों में हाल के वर्षों में कई प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक क्षण भी देखने को मिले। जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस ‘बैस्टिल डे’ परेड में मुख्य अतिथि थे। इसके बाद वर्ष 2024 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इन आयोजनों ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को वैश्विक मंच पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।

संयुक्त सैन्य अभ्यास: सहयोग की रीढ़

भारत और फ्रांस नियमित रूप से तीन प्रमुख संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं। थल सेना के बीच ‘शक्ति अभ्यास’, नौसेना के लिए ‘वरुण अभ्यास’ और वायु सेना के बीच ‘गरुड़ अभ्यास’ आयोजित किए जाते हैं। ये अभ्यास न केवल सैन्य समन्वय को बेहतर बनाते हैं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में दोनों देशों की साझा तैयारियों को भी मजबूत करते हैं।

यूरोपीय सहयोग से बढ़ी रणनीतिक गहराई

हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी ने यूरोपीय देशों के साथ भारत के संबंधों को और व्यापक बनाया है। फ्रांस इस संदर्भ में भारत का एक प्रमुख और भरोसेमंद साझेदार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–फ्रांस रक्षा वार्ता इस व्यापक रणनीतिक सहयोग को और संस्थागत रूप देगी।

फ्रांसीसी रक्षा मंत्री की पहली भारत यात्रा

12 अक्तूबर 2025 को फ्रांस की रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद कैथरीन वाउटरिन की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस यात्रा को दोनों देशों के रक्षा संबंधों के लिए विशेष महत्व का माना जा रहा है। भारत–फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद, रक्षा और सुरक्षा सहयोग की नियमित समीक्षा के लिए आयोजित की जाने वाली एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक है। इसका पांचवां संस्करण 11 से 13 अक्तूबर 2023 के बीच फ्रांस में आयोजित हुआ था।

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