प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने दिये एक लाख करोड़ रुपए

धानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश के शहरों को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (Urban Challenge Fund – UCF) को मंजूरी दी है, जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए एक लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस निर्णय को भारत के शहरी विकास मॉडल में बड़े संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

शहर बनेंगे विकास के नए इंजन

सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार शहर होंगे। तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक विस्तार और सेवा क्षेत्र की वृद्धि के साथ शहरों पर दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ शहरी ढांचे की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। अर्बन चैलेंज फंड का उद्देश्य केवल इमारतें या सड़कें बनाना नहीं, बल्कि ऐसे शहर तैयार करना है जो लचीले (resilient), उत्पादक, समावेशी और जलवायु-अनुकूल हों। यह पहल नागरिक-केंद्रित सुधारों, निजी भागीदारी और बाजार आधारित वित्त को बढ़ावा देकर शहरों को अधिक प्रतिस्पर्धी और सक्षम बनाने की दिशा में काम करेगी।

वित्तीय मॉडल में बड़ा बदलाव

इस कोष की खासियत इसका वित्तीय ढांचा है। परियोजना लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार सहायता के रूप में देगी, लेकिन शर्त यह होगी कि कम से कम 50 प्रतिशत राशि बाजार से जुटाई जाए। इसका मतलब है कि निजी निवेश, बॉन्ड बाजार और अन्य वित्तीय साधनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल पारंपरिक अनुदान-आधारित व्यवस्था से हटकर सुधार-उन्मुख और परिणाम-आधारित वित्तपोषण की ओर बड़ा कदम है। इससे शहरी परियोजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ेगी। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इस पहल के माध्यम से शहरी क्षेत्र में कुल चार लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित किया जा सकेगा।

सुधारों से जुड़ा होगा फंड आवंटन

अर्बन चैलेंज फंड केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं रहेगा। कोष का आवंटन स्पष्ट लक्ष्यों, मापनीय परिणामों और सुधारों से जुड़ा होगा। जिन शहरों और राज्यों में सुधारों की निरंतरता और प्रभावी क्रियान्वयन दिखाई देगा, उन्हें आगे की किस्तें जारी की जाएंगी। परियोजनाओं के चयन में परिवर्तनकारी प्रभाव, स्थिरता, जलवायु-अनुकूलता और नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ जैसे मानदंडों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि निवेश केवल ढांचागत विस्तार तक सीमित न रहकर दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक लाभ भी प्रदान करे।

डिजिटल और पेपरलेस निगरानी व्यवस्था

कोष के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवास और शहरी कार्य मंत्रालय एकल डिजिटल पोर्टल के माध्यम से परियोजनाओं की निगरानी करेगा। यह पूरी प्रक्रिया कागजरहित (paperless) होगी, जिससे डेटा की रियल-टाइम ट्रैकिंग और प्रगति की नियमित समीक्षा संभव होगी। डिजिटल मॉनिटरिंग से परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह व्यवस्था नीति-निर्माताओं को समय पर निर्णय लेने में भी सहायक होगी।

समयसीमा और भविष्य की योजना

कैबिनेट के अनुसार, अर्बन चैलेंज फंड वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक परिचालन में रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर इसकी कार्यान्वयन अवधि को वित्त वर्ष 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है। यह लंबी अवधि की योजना दर्शाती है कि सरकार शहरी विकास को तात्कालिक परियोजना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक परिवर्तन के रूप में देख रही है।

समावेशी और जलवायु-अनुकूल विकास

आज के दौर में शहरी विकास केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह सकता। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जल संकट और आवास की कमी जैसे मुद्दे शहरों के सामने बड़ी चुनौती हैं। अर्बन चैलेंज फंड इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहित करेगा जो पर्यावरण के अनुकूल हो और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा दे। इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि भारतीय शहर न केवल रहने योग्य (livable) बनेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बन सकेंगे।

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