नई दिल्ली में शुक्रवार का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अहम पड़ाव साबित हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। इस अवसर को देश के कई शीर्ष नेताओं ने ऐतिहासिक क्षण बताया और इसे आधुनिक, पारदर्शी व नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सराहा।
आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन आत्मनिर्भर और विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक नया भवन नहीं, बल्कि भारत के प्रशासनिक ढांचे में सोच और कार्यसंस्कृति के परिवर्तन का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह पहल देश को औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे ले जाकर सेवा और कर्तव्य आधारित आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देती है।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि आधुनिक भारत की पहचान अब केवल ऐतिहासिक विरासत से नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और कार्यक्षमता से तय होगी। ‘सेवा तीर्थ’ इसी नई सोच का साकार रूप है, जहां शासन व्यवस्था अधिक समन्वित, तेज और परिणामोन्मुख होगी।
जनसेवा को सर्वोपरि रखने की दिशा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस अवसर को भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में जनसेवा को सर्वोच्च स्थान देने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सेवा-भाव को शासन का मूल मंत्र बनाया है। ‘सेवा तीर्थ’ उसी संकल्प का प्रतीक है, जहां प्रशासन का हर निर्णय और हर प्रक्रिया नागरिकों के हित को ध्यान में रखकर संचालित होगी।
अमित शाह के अनुसार, यह परिसर विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं को देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। उन्होंने इसे विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर बताया।
आधुनिक कार्य-संस्कृति की शुरुआत
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन नए भारत की आधुनिक कार्य-संस्कृति के एक गौरवशाली अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के उस विजन का जीवंत स्वरूप बताया, जिसमें सेवा को सबसे पवित्र कर्तव्य माना गया है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय का एक ही परिसर में आना शासन प्रक्रियाओं को सरल, प्रभावी और तेज बनाएगा। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय संभव होगा।
एकीकृत और डिजिटल प्रशासन
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘सेवा तीर्थ’ की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए बताया कि यह परिसर अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां पेपरलेस कार्य-संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे न केवल कार्यकुशलता बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। डिजिटल अभिलेखागार, उन्नत कॉन्फ्रेंस कक्ष और सुरक्षित संचार व्यवस्था इस परिसर को भविष्य के लिए तैयार प्रशासनिक केंद्र बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि एकीकृत संरचना के कारण विभिन्न उच्चस्तरीय कार्यालयों के बीच तालमेल और अधिक प्रभावी होगा। इससे नीति-निर्माण और क्रियान्वयन के बीच की दूरी कम होगी तथा प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
सेवा और कर्तव्य की नई परिभाषा
‘सेवा तीर्थ’ नाम अपने आप में शासन के नए दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह केवल कार्यालय परिसर नहीं, बल्कि उस विचारधारा का प्रतीक है जिसमें सत्ता को सेवा का माध्यम माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से “सेवा ही सर्वोपरि” की भावना पर बल देते रहे हैं। इस परिसर के माध्यम से उसी सोच को संस्थागत रूप दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एकीकृत प्रशासनिक ढांचा निर्णय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा। इससे नीतियों के क्रियान्वयन में देरी कम होगी और नागरिकों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचेगा।
भविष्य की ओर कदम
‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन केवल एक इमारत के लोकार्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन के स्वरूप में बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम है। डिजिटल, पेपरलेस और समेकित प्रशासन की यह पहल आने वाले वर्षों में सरकारी कार्यप्रणाली को और अधिक आधुनिक बनाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पहल भारत को 21वीं सदी की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने का प्रयास है। आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और सुशासन के संकल्प को मजबूत करने में ‘सेवा तीर्थ’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
