हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। भारतीय नौसेना की ताकत में जल्द ही और इजाफा होने वाला है, क्योंकि रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक व्यापार का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा भारतीय समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए बेहद अहम बन चुकी है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में इन विमानों के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) को हरी झंडी दी गई। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, इन P-8I विमानों की खरीद से भारतीय नौसेना की लंबी दूरी की समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता और समुद्री हमले की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
क्यों अहम है यह खरीद?
भारत के आसपास के समुद्री क्षेत्र न सिर्फ रणनीतिक रूप से संवेदनशील हैं, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हिंद महासागर से होकर तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की आवाजाही होती है। ऐसे में समुद्र में किसी भी तरह की चुनौती—चाहे वह दुश्मन पनडुब्बियों की गतिविधि हो, समुद्री डकैती हो या अवैध तस्करी—भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर सकती है।
इन्हीं खतरों को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना पिछले कुछ वर्षों से अपने बेड़े को आधुनिक बनाने पर लगातार काम कर रही है। नए युद्धपोत, पनडुब्बियां और अत्याधुनिक विमान इसी रणनीति का हिस्सा हैं। P-8I विमान इसी कड़ी का एक बेहद अहम स्तंभ हैं।
अमेरिका से होगी खरीद, पहले से सेवा में हैं P-8I
ये 6 अतिरिक्त P-8I विमान अमेरिका से खरीदे जाएंगे। भारतीय नौसेना पहले से ही इस प्लेटफॉर्म का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रही है। अब तक भारत अमेरिका से कुल 12 P-8I विमान खरीद चुका है। इनमें से 8 विमान साल 2009 में पहले चरण में और 4 विमान साल 2016 में दूसरे चरण में नौसेना में शामिल किए गए थे।
नवंबर 2019 में भी DAC ने 6 अतिरिक्त P-8I विमानों के लिए AoN को मंजूरी दी थी। हालांकि, हर AoN की एक तय समय-सीमा होती है। यदि उस अवधि के भीतर खरीद प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, तो या तो मंजूरी को बढ़ाया जाता है या फिर पूरे मामले को नए सिरे से मंजूरी के लिए लाया जाता है। इस बार परिषद ने इसे फ्रेश केस के रूप में फिर से स्वीकृति दी है।
अमेरिका ने मई 2021 में ही भारत को 6 P-8I विमान और उनसे जुड़े उपकरणों की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद, पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान जारी संयुक्त बयान में भी साफ कहा गया था कि भारत की समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए 6 अतिरिक्त P-8I लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस विमानों की खरीद प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी, क्योंकि बिक्री की शर्तों पर दोनों देशों के बीच सहमति बन चुकी है।
P-8I की खासियत क्या है?
P-8I विमान को भारतीय नौसेना की आंख और कान कहा जाता है। यह विमान 41,000 फीट की ऊंचाई से उड़ान भरते हुए समुद्र की गहराइयों में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम है। यही नहीं, जरूरत पड़ने पर यह उन्हें निशाना भी बना सकता है।
इस विमान की उड़ान क्षमता भी इसे खास बनाती है। एक बार में यह करीब 8,300 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है, जिससे यह पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी अवधि तक निगरानी कर सकता है। P-8I में कुल 11 हार्ड पॉइंट लगे होते हैं—5 इंटरनल और 6 विंग्स पर। इन हार्ड पॉइंट्स के जरिए यह एंटी-शिप मिसाइल ‘हारपून’, क्रूज मिसाइल, हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर चार्ज और समुद्री माइंस लॉन्च कर सकता है।
इसके अलावा, यह विमान अत्याधुनिक मल्टी-मिशन सर्फेस सर्च रडार से लैस है, जो समुद्र की सतह और नीचे होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है। यही वजह है कि P-8I को पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) और समुद्री निगरानी के लिए दुनिया के सबसे बेहतरीन विमानों में गिना जाता है।
हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका
6 अतिरिक्त P-8I विमानों की खरीद न सिर्फ सैन्य दृष्टि से अहम है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को भी और मजबूत करती है। भारत खुद को एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में स्थापित करना चाहता है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे और समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें।
इन विमानों के शामिल होने से भारतीय नौसेना को समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों पर जल्दी प्रतिक्रिया देने, मित्र देशों के साथ संयुक्त अभ्यास करने और जरूरत पड़ने पर मानवीय सहायता व आपदा राहत अभियानों में भी मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, P-8I विमानों की यह नई खेप भारतीय नौसेना की ताकत, भरोसे और तकनीकी बढ़त का प्रतीक है, जो आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
