आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, कृषि, शिक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य और विनिर्माण जैसे पांच अहम क्षेत्रों में एआई का योगदान 2035 तक करीब 550 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
वियतनाम टाइम्स की रिपोर्ट में पीडब्ल्यूसी इंडिया की स्टडी का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत में एआई को केवल तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि विकास, समावेशन और सुशासन के औज़ार के तौर पर देखा जा रहा है। पीडब्ल्यूसी की ‘AI एज फॉर विकसित भारत’ स्टडी को दावोस 2026 में विश्व आर्थिक मंच में पेश किया गया, जहां भारत ने अपनी एआई रणनीति को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत एआई को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए 3A2I फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है, जिसमें एक्सेस, स्वीकृति, एसिमिलेशन, कार्यान्वयन और संस्थागतकरण शामिल हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एआई केवल प्रयोग तक सीमित न रहे, बल्कि रोजमर्रा के कामकाज और सार्वजनिक प्रणालियों का हिस्सा बने।
स्टडी में कहा गया है कि एआई के जरिए भारत परिचालन दक्षता, पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और स्थिरता को मजबूत कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, ऊर्जा क्षेत्र में स्मार्ट मीटरिंग से बिजली चोरी पर लगाम लगी है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं में एआई आधारित टीबी पहचान उपकरणों से रोग निगरानी में बड़ा सुधार हुआ है।
