भारत और अफ्रीका के बीच रणनीतिक रिश्ते अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि व्यापार, तकनीक और वैश्विक नेतृत्व के नए आयाम छू रहे हैं। भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त प्रोफेसर अनिल सूकलाल ने कहा है कि जी20 में अफ्रीकी संघ को पूर्ण सदस्यता दिलाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल ने भारत को ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में स्थापित किया है और इससे भारत–अफ्रीका संबंधों को नई मजबूती मिली है।
सूकलाल के अनुसार, भारत और दक्षिणी अफ्रीकी देशों के बीच प्रस्तावित भारत–एसएसीयू (दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ) मुक्त व्यापार समझौता दोनों क्षेत्रों के लिए “गेम चेंजर” साबित हो सकता है। यह समझौता न केवल व्यापार और निवेश को गति देगा, बल्कि भारत और अफ्रीका के किसी क्षेत्रीय समूह के बीच पहला ऐसा व्यापक मुक्त व्यापार करार होगा, जो आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।
उन्होंने बताया कि एसएसीयू में बोत्सवाना, इस्वातिनी, लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीका इस समूह के तहत भारत के साथ व्यापार वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। दोनों पक्षों ने बातचीत को तेज़ करने और व्यावहारिक परिणामों तक पहुंचने पर सहमति जताई है।
व्यापार में पहले से मजबूत आधार
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। दक्षिण अफ्रीका अफ्रीकी महाद्वीप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि भारत वैश्विक स्तर पर दक्षिण अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा साझेदार माना जाता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अफ्रीका के साथ भारत के कुल व्यापार में दक्षिण अफ्रीका की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है, जो दोनों देशों के मजबूत आर्थिक रिश्तों को रेखांकित करता है।
उद्योग और निवेश पर फोकस
हाल ही में आयोजित सीआईआई भारत–अफ्रीका कॉन्क्लेव को दोनों देशों के संबंधों में अहम पड़ाव माना जा रहा है। इस मंच पर दक्षिण अफ्रीका के व्यापार, उद्योग एवं प्रतिस्पर्धा मंत्री पार्क्स ताऊ की भागीदारी और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई द्विपक्षीय बातचीत ने निवेश, विनिर्माण और सप्लाई चेन सहयोग को नई दिशा दी है।
ग्लोबल साउथ की आवाज़ बना भारत
सूकलाल ने कहा कि भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को पूर्ण सदस्यता मिलना केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं था, बल्कि इससे विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी का अवसर मिला। ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ जैसी पहल ने भारत की नेतृत्व क्षमता को और मजबूत किया है, जिसकी अफ्रीकी देशों में व्यापक सराहना हुई।
आईबीएसए और एआई में भविष्य का सहयोग
भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बीच आईबीएसए मंच वैश्विक संस्थानों में सुधार और बहुपक्षीय सहयोग की वकालत करता रहा है। हालिया बैठकों में,, के क्षेत्र में साझा मानक, जिम्मेदार तकनीकी विकास और कौशल साझेदारी पर चर्चा हुई। सूकलाल के अनुसार, भारत में प्रस्तावित एआई शिखर सम्मेलन ग्लोबल साउथ के लिए तकनीकी नेतृत्व का नया मंच बनेगा।
सहयोग ही समाधान
जी20 बैठकों के दौरान वैश्विक चुनौतियों—जैसे जलवायु परिवर्तन, तकनीकी असमानता और आर्थिक अनिश्चितता—से निपटने के लिए सहयोग को ही एकमात्र रास्ता बताते हुए सूकलाल ने कहा कि बहुपक्षीय मंचों की सामूहिक शक्ति पर भरोसा करना समय की मांग है।
