निवेशकों का भरोसा बरकरार, गोल्ड ETF चमका और फ्लेक्सी-कैप फंड्स बने पसंदीदा

नए साल 2026 की शुरुआत निवेशकों के लिए भरोसे और संतुलन का संकेत लेकर आई है। जनवरी महीने में जारी म्यूचुअल फंड आंकड़ों से साफ है कि निवेशक जोखिम और सुरक्षा—दोनों के बीच समझदारी भरा संतुलन बना रहे हैं। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लोगों का झुकाव म्यूचुअल फंड्स की ओर बना हुआ है।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। इस श्रेणी में निवेश लगभग दोगुना होकर 24,039 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो दिसंबर में 11,647 करोड़ रुपये था। यह दिखाता है कि निवेशक इक्विटी के साथ-साथ सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों को भी अहमियत दे रहे हैं।

हालांकि एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश दिसंबर के मुकाबले कुछ कम रहा और यह 24,029 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, फिर भी कुल मिलाकर निवेशकों का भरोसा कमजोर नहीं पड़ा। जनवरी में पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग में 1.56 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया, जबकि दिसंबर में भारी निकासी देखी गई थी।

इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे, जिनमें 7,672 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ। लार्ज-कैप फंड्स में भी निवेश बढ़ा, जबकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी रही। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर और संतुलित विकल्पों की ओर झुक रहे हैं।

डेट फंड्स के लिए भी जनवरी राहत भरा महीना रहा। दिसंबर में भारी निकासी के बाद इस श्रेणी में 74,800 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया। लिक्विड और ओवरनाइट फंड्स में मजबूत प्रवाह यह दर्शाता है कि निवेशक सुरक्षित और कम जोखिम वाले साधनों में भी भरोसा जता रहे हैं।

एसआईपी के जरिए हर महीने आने वाला निवेश 31,000 करोड़ रुपये के स्तर पर स्थिर रहा, जो निवेशकों की लंबी अवधि की सोच और अनुशासन को दिखाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर निवेशकों का भरोसा कायम है, और यही भरोसा म्यूचुअल फंड निवेश को लगातार सहारा दे रहा है।

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