प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकप्रिय संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए परीक्षा के तनाव, जीवन कौशल और समग्र विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। जारी किए गए दूसरे वीडियो में उन्होंने विद्यार्थियों को परीक्षा को जीवन का एक हिस्सा मानकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल अंकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि खेल, रचनात्मकता, नवाचार और आत्म-विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने छोटे स्तर से स्टार्टअप शुरू करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि बड़े सपने अक्सर छोटी शुरुआत से ही साकार होते हैं। साथ ही, उन्होंने उद्योग जगत के पेशेवरों से जुड़ने और वास्तविक दुनिया के अनुभव प्राप्त करने पर जोर दिया।
पढ़ाई और व्यक्तिगत रुचियों के बीच संतुलन पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अकादमिक और रचनात्मक गतिविधियां एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों मिलकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होती हैं। उन्होंने कहा कि कला और रचनात्मक शौक तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी को राष्ट्र निर्माण की नींव बताते हुए प्रधानमंत्री ने स्वच्छता, यातायात नियमों के पालन और भोजन की बर्बादी रोकने जैसे छोटे लेकिन जरूरी कदमों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘वेड इन इंडिया’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर नागरिक का छोटा प्रयास 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत करता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीक पर विद्यार्थियों की जिज्ञासा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसका जिम्मेदारी और समझदारी से उपयोग करना चाहिए। उन्होंने तकनीक को सीखने और नवाचार का सशक्त माध्यम बताया।
यात्रा को शिक्षा से जोड़ते हुए पीएम मोदी ने विद्यार्थियों को पर्यटक नहीं, बल्कि जिज्ञासु शिक्षार्थी बनकर नए स्थानों को समझने की सलाह दी। उन्होंने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, टीम भावना और संघर्ष कर रहे सहपाठियों की मदद करने की भी बात कही।
शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को रोजाना खेल और श्वास-प्रश्वास अभ्यास अपनाने की सलाह दी। पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हमारी आदत बननी चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों पर अनावश्यक तुलना का दबाव न डालने की अपील की और विद्यार्थियों को आत्म-सुधार पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य परीक्षा के तनाव को कम करना और इसे जीवन के उत्सव के रूप में देखने की सोच विकसित करना है। इस वर्ष देश के विभिन्न शहरों में संवाद सत्र आयोजित किए गए, जिसमें मायगॉव पोर्टल के माध्यम से 4.5 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने पंजीकरण कराया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के यूट्यूब चैनल, दूरदर्शन, आकाशवाणी, शिक्षा मंत्रालय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेव्स ओटीटी पर प्रसारित किया गया।
