जब सेहत की बात आती है, तो ज़्यादातर लोग दिल की बीमारी या कैंसर जैसी समस्याओं पर ध्यान देते हैं, लेकिन हड्डियों की सेहत को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। खासकर तब जब उम्र बढ़ रही होती है पुरुषों की तुलना में महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ ही यह समस्या ओर गंभीर बन सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस(osteoporosis) नाम की बीमारी हड्डियों को धीरे-धीरे कमजोर कर देती है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल ब्रांच की प्रोफेसर,और मेनोपॉज़ स्पेशलिस्ट डॉ. मैरी क्लेयर हैवर ने इस खतरे को बेहद गंभीर बताया है। उनके अनुसार, “लगभग 50% महिलाएँ अपने जीवनकाल में ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis)से जुड़ा फ्रैक्चर झेलती हैं, जो पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज़्यादा है।”
- आप जानते क्या है ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis)?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्थराइटिस के मुताबिक, ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों का घनत्व (Bone Density) और उनकी मजबूती कम होने लगती है। नतीजा यह होता है कि हल्की सी चोट, या जरा सा गिरने से यहां तक की कई बार ज़ोर से खाँसना से भी हड्डी टूट सकती है और तो और या रोज़मर्रा का दबाव भी हड्डी तोड़ सकता है।डॉ. हैवर बताती हैं कि 50 साल की उम्र तक हर दूसरी महिला को ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़ा फ्रैक्चर हो सकता है, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा सिर्फ 20% है। ऐसे फ्रैक्चर के बाद ज़िंदगी पर इसका असर काफी गंभीर हो सकता है — चलने-फिरने में परेशानी, लंबा इलाज, यहाँ तक कि जान का खतरा भी।
- जोखिम और छुपे हुए चेतावनी संकेत
ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर “साइलेंट डिज़ीज़” कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण तब तक सामने नहीं आते जब तक हड्डी टूट न जाए। फिर भी कुछ हल्के संकेत हो सकते हैं, जो हड्डियों के कमजोर होने की ओर इशारा करते हैं।
जैसे:
हार्मोन असंतुलन
कैल्शियम की कम
खाने से जुड़ी समस्याएँ (डिसऑर्डर्ड ईटिंग)
परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस की हिस्ट्री हो
जिन्होंने लंबे समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाइयाँ ली हों
जिन्हें सीलिएक हो,
आंतों की सूजन, किडनी लिवर की बीमारी,हो
रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी समस्याएँ हों
- अच्छी खबर: यह बीमारी काफी हद तक रोकी जा सकती है
डॉ. हैवर कहती हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस पूरी तरह टाली जा सकने वाली बीमारी है, अगर समय रहते ध्यान दिया जाए और दैनिक जीवन के क्रयाकलोपों में बस थोड़ा बदलाव किया जाए जैसे:
नियमित रूप से वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज़ (जैसे चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना) करें
रेज़िस्टेंस ट्रेनिंग से हड्डियों को मज़बूत बनाएं
सही खानपान और ज़रूरत के अनुसार कैल्शियम व विटामिन D लें अगर महिलाएँ कम उम्र से ही अपनी जीवनशैली और आदतों पर ध्यान दें, तो बुढ़ापे में आज़ादी और आत्मनिर्भरता को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
