प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मलेशिया दौरे के दौरान वहां रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों और नेताओं के साथ संवाद किया। इस अवसर पर मंत्री, सीनेटर, सांसद और आज़ाद हिंद फौज (इंडियन नेशनल आर्मी–आईएनए) के वयोवृद्ध सदस्य भी मौजूद रहे। यह संवाद भारत और मलेशिया के बीच लोगों से लोगों के रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने मलेशिया की प्रगति और विकास में भारतीय प्रवासियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भारत–मलेशिया संबंधों को सुदृढ़ करने में प्रवासी भारतीयों की सकारात्मक भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया।
इस दौरान भारतीय मूल के नेताओं ने भारत और मलेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने भारत में हो रहे परिवर्तनकारी बदलावों और विकासोन्मुख नीतियों की भी प्रशंसा की, साथ ही भारत की दीर्घकालिक विकास दृष्टि में भरोसा जताया।
संवाद के दौरान मलेशिया में भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए उठाए गए कई महत्वपूर्ण कदमों को भी सराहा गया। इनमें मलेशिया में भारत का पहला वाणिज्य दूतावास खोलने का निर्णय, यूनिवर्सिटी मलाया में तिरुवल्लुवर सेंटर की स्थापना, तिरुवल्लुवर स्कॉलरशिप की शुरुआत, छठी पीढ़ी तक के भारतीय मूल के लोगों के लिए ओसीआई कार्ड के दायरे का विस्तार और मलेशियाई भारतीय छात्रों के लिए इंडियन स्कॉलरशिप ट्रस्ट फंड में अतिरिक्त सहायता शामिल है।
प्रधानमंत्री ने आज़ाद हिंद फौज की बालक सेना के वयोवृद्ध सदस्य और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने आईएनए के सैनिकों के अद्वितीय साहस और बलिदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि उनका योगदान देश के इतिहास में सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। साथ ही, उन्होंने एक सशक्त और आधुनिक भारत के निर्माण के नेताजी के विजन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
यह संवाद न केवल प्रवासी भारतीयों के साथ भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है, बल्कि भारत–मलेशिया संबंधों को वैश्विक मंच पर और मजबूत करने की दिशा में भी एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है।
