ओलंपिक समिति की नई ट्रांसजेंडर नीति पर बनी सहमति

अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की पात्रता को लेकर एक बड़ा फैसला होने जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने कहा है कि विभिन्न खेलों में ट्रांसजेंडर एथलीट्स की भागीदारी से जुड़े नए पात्रता मानदंडों पर व्यापक सहमति बन गई है। इस नई नीति की घोषणा इस साल की पहली छमाही में किए जाने की उम्मीद है।

यह पहली बार होगा जब आईओसी और अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ मिलकर एक समान और एकरूप नीति लागू करेंगे, जो ओलंपिक खेलों और विश्व चैंपियनशिप समेत दर्जनों खेलों के बड़े आयोजनों पर लागू होगी। फिलहाल अलग-अलग खेल महासंघों के अपने-अपने नियम हैं, जिनमें काफी भिन्नता देखने को मिलती है।

हालांकि नई नीति के सभी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि यह नियम महिला वर्ग में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी को कड़े रूप से सीमित कर सकता है, खासतौर पर उन मामलों में जहां खिलाड़ियों ने मेडिकल ट्रांजिशन से पहले पूर्ण पुरुष यौवन (मेल प्यूबर्टी) का अनुभव किया हो।

आईओसी ने इस दिशा में जून महीने में पहल करते हुए एक समान नीति की ओर कदम बढ़ाया था। समिति की पहली महिला अध्यक्ष बनने के बाद यह उनके प्रमुख सुधारों में से एक माना जा रहा है।

आईओसी के प्रवक्ता ने कहा कि
“महिला वर्ग की सुरक्षा इस सुधार का एक अहम उद्देश्य है। इस नीति पर परामर्श प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और खेल जगत में इसे लेकर सामान्य सहमति बन चुकी है।”

सितंबर में इस मुद्दे पर गहराई से विचार करने के लिए ‘महिला वर्ग की सुरक्षा’ नाम से एक वर्किंग ग्रुप भी गठित किया गया था। इस समूह में विशेषज्ञों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिनका उद्देश्य खेलों में निष्पक्षता और प्रतिस्पर्धा की भावना को बनाए रखना है।

नए नियम लागू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय खेलों में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर लंबे समय से चल रही बहस पर एक स्पष्ट दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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