भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत कार्यरत इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी) के खिलाफ एक प्रभावी वैक्सीन विकसित करने की दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है। क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज पश्चिमी घाट क्षेत्र में पाई जाने वाली एक गंभीर क्षेत्रीय संक्रामक बीमारी है, जो कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, गोवा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों को प्रभावित करती है।
कर्नाटक राज्य सरकार के अनुरोध पर आईसीएमआर ने केएफडी के लिए नई वैक्सीन के विकास की पहल की। इस परियोजना के तहत इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (आईआईएल) और आईसीएमआर–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) मिलकर एक पूरी तरह स्वदेशी, दो खुराक वाली एडज्यूवेंटेड इनएक्टिवेटेड वैक्सीन विकसित कर रहे हैं। यह वैक्सीन 28 दिनों के अंतराल पर दी जाएगी।
वैक्सीन का विकास सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और जानवरों पर किए गए चैलेंज व टॉक्सिसिटी अध्ययन भी समाप्त हो चुके हैं। इसके साथ ही जीएलपी-ग्रेड वैक्सीन सामग्री का निर्माण किया गया है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) से मंज़ूरी मिलने के बाद वैक्सीन का फेज़-I ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल शुरू कर दिया गया है।
यदि फेज़-I ट्रायल सफल रहता है, तो आगे के चरणों के क्लिनिकल ट्रायल किए जाएंगे। वैक्सीन के सुरक्षित और प्रभावी पाए जाने पर सीडीएससीओ से इसके उपयोग की औपचारिक मंज़ूरी मांगी जाएगी।
भारत सरकार कठिन और उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकारों को निरंतर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है और यह पहल देश में क्षेत्रीय संक्रामक रोगों के नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
